Welcome to KESARI DARPAN Charitable Trust

केसरी दर्पण चैरिटेबल ट्रस्ट एक समाजिक संस्था हैं जिसका उद्देश्य केसरवानी समाज को  शिक्षा, कॉरपोरेट, राजनैतिक , साहित्य, खेल एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र से आने वाले लोगों को एक मंच पर लाना जिससे केसरवानी समाज भारत के एक संगठित एवं श्रेष्ठ समाज के रूप में दिखाई दे सके ।

         केसरी दर्पण चैरिटेबल ट्रस्ट‌ का रजिस्ट्रेशन सात सदस्यीय टीम के द्वारा 22/09/2020 को पटना में कराया गया जिसका रजिस्ट्रेशन नम्बर बिहार/373/2020 हैं । 

                                 

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Our Mission

केसरवानी समाज को केसरी दर्पण चैरिटेबल ट्रस्ट एवं केसरी दर्पण पत्रिका के माध्यम से एक मंच पर लाना

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"जिसने अपने महत्त्वाकांक्षाओं को बर्बर नहीं बनने दिया, बल्कि उन्हें विनम्र अभिलाषाओं के साये में पोषित किया , वे सभी लोग राष्ट्र एवं समाज के इतिहास में अविस्मरणीय होते हैं अर्थात उन्हें कभी समाज एवं राष्ट्र नहीं भूल सकता "

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लीडरशिप एक गुण है जिससे आप दूसरों पर बढ़त प्राप्त कर सकते हैं। नेता सार्वजनिक जीवन जीते हैं जिससे आसपास के लोगों को मार्गदर्शन और प्रेरणा मिलती है। एक महान नेता में कई गुण होते हैं जो उन्हें लोकप्रिय बनाते हैं। लीडरशिप करने की क्षमता एक गुण है जो कुछ ही लोगों के अन्दर देखी जाती है। कुछ लोगों को यह विरासत में मिलती है जबकि कुछ इसे समय की अवधि के साथ प्राप्त करते हैं। कुछ लोगों में जन्म से ही नेताओं के गुण पाए जाते हैं। ऐसे गुण उन्हें विरासत में मिलते है या यूँ कहे उनके खून में पाए जाते है। अन्य लोग ऐसे व्यक्तियों से प्रेरित हो लीडरशिप के गुण हासिल करने के लिए लगातार प्रयास करते हैं। कुछ इन गुणों को प्राप्त करने में असफल रह जाते हैं और कुछ लगातार प्रयासों के माध्यम से इन्हें प्राप्त करने में सफल हो जाते हैं। हालांकि लीडरशिप एक शक्तिशाली गुण है इसके अलावा नेताओं के पास अन्य कई ऐसे गुण होते हैं जो उनकी लोकप्रियता को बढ़ाते हैं।एक अच्छे नेता के चार मुख्य गुण हैं : - ईमानदारी- ईमानदारी नेता के मुख्य गुणों में से एक है। एक नेता उदाहरण के आधार पर लीडरशिप करता है इसलिए यदि आप चाहते हैं कि आपकी टीम आपकी उम्मीदों पर खरी उतरे, आपकी विचारधाराओं पर भरोसा करे, आपके द्वारा प्रदान किए गए कार्यों में ईमानदारी का पालन करें तो आपको खुद ईमानदार होना ज़रूरी है। एक धोखेबाज व्यक्ति हेराफेरी के जरिए लोगों को आकर्षित ज़रूर कर सकता है पर वह जल्द ही निश्चित रूप से अपनी विश्वसनीयता खो देगा।संचार- एक नेता खुद को दूसरों से बेहतर नहीं समझता इसलिए वह किसी से भी दूरी बनाए रखने में विश्वास नहीं करता। वह विचारों को साझा करने, मुद्दों पर चर्चा करने और सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए दो तरफा संचार का प्रवाह सुनिश्चित करता है। नेताओं के आत्मविश्वास का स्तर त्रुटिहीन है। वे अपने स्वयं के कार्यों और सोच के बारे में निश्चित हैं और अपने अनुयायीओं को कैसे प्रेरित करना है यह अच्छी तरह से जानते हैं। अच्छे नेताओं को अपनी टीम में पूरा विश्वास होता है।पारदर्शिता -अच्छे नेता तथ्यों के साथ छेड़खानी नहीं करते। व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों रिश्तों में काम करते समय वे पारदर्शिता बनाए रखते हैं। यह उनके लक्षणों में से एक है जिसके लिए नेता की छवि अत्यधिक विश्वसनीय और सम्मानित मानी जाती हैं।धैर्य -जो व्यक्ति असहिष्णु है, जिसे अक्सर गुस्सा आता है वह कभी भी अच्छा नेता बनने के योग्य नहीं हो सकता है। एक अच्छे नेता बनने के लिए धैर्य रखना मुख्य कुंजी है। अगर कोई व्यक्ति धैर्य रखता है तो ही वह दूसरों की गलतियों को समझ सकता है और उन्हें सुलझाने में सहायता कर सकता है।

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ऐसा हम सभी के साथ बहुत बार होता है की किसी व्यक्ति विशेष ने बहुत साल पहले हमें कोई बात समझाई थी, जिससे हम उस समय सहमत नहीं थे, परन्तु उस बात का सही अर्थ हमें कई वर्षों बाद समझ आता है और तब हमें अहसास होता है की उसकी कही वो बात बिल्कुल सही थी। हम भी दिन भर न जाने कितने ही लोगो को बहुत कुछ समझाते हैं और पाते हैं की वह हमारी बातों को नहीं समझ रहा है या यूँ कहे की नज़रअंदाज़ कर रहा है। उसे समझाने की बार बार की गई असफल कोशिशों को हम अपनी हार मान बैठतें हैं और अंदर से बिखरने लगते हैं, इसी कारण हम अक्सर अपना आपा भी खो बैठते हैं और अपना गुस्सा सामने वाले पर उतार देते हैं। एक बात जो कभी हमारे जहन में नही आती की जैसे हमने किसी दूसरे की बात को समझने में इतने वर्ष लिए हैं, ठीक उसी प्रकार दूसरे व्यक्ति को भी हमारी बातों का अर्थ समझने में कुछ हफ्ते, महीने या वर्ष लग सकते हैं। यहां हर किसी की अपनी सोच है हम सभी अपनी तरफ से किसी दूसरे की सोच बदलने की भरपूर कोशिश कर सकते है पर किसी की भी सोच को बदलना लगभग नामुनकिन है। यह केवल तभी संभव है जब सामने वाला खुद अपने अंदर बदलाव लाने को तैयार हो। अगर समझाने भर से किसी की सोच बदलती तो रामायण और महाभारत का युद्ध कभी नही होता, याद कीजिये की युद्ध को टालने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने भी शांतिदूत बनकर कौरवों को समझाने की बहुत कोशिश की थी और भगवान श्री राम ने भी रावण को समझाने की भरपूर कोशिश की थी। जब स्वयं भगवान श्री राम और श्री कृष्ण भी मानव अवतार में रावण और कौरवों को नही बदल पाये तो हम इंसानो की क्या हैसियत है? नियति में सब कुछ पहले से ही तय है हम सभी इंसान बस एक जरिया है और कुछ नही। किसी भी इंसान की सोच तभी बदलती है जब शुरुवात उसके अंतर्मन से होती है, दूसरे द्वारा दी गयी सलाह भी तभी काम करती है जब कोई खुद को बदलने की कोशिश करना चाहता हो। इसका सब बड़ा उदाहरण है वाल्मीकि, किस प्रकार नारद मुनि की सलाह मानकर अपने अंदर बदलाव लाकर रत्नागर नाम का डाकू महर्षि वाल्मीकि में तब्दील हो गया। इसलिए हमें बिना हताश हुए बस अपनी कोशिशें जारी रखनी चहिये, किसी में बदलाव लाना कभी हमारे बस में था ही नही..

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जीवन में… दुःख न होगा तो… जीवन का अर्थ…क्या होगा… केवल सुख को…भोगने वाला… ठीक उसी…सिद्धार्थ की भाँति… एक दिन… मोक्ष के मार्ग पर…निकलकर… बुद्ध हो जायेगा…। इतिहास साक्ष्य है… कि जीवन… जो सरल होता उसका यथार्थ… सदैव ही कठोर होता है इसलिए यथार्थ को सरल बनाने हेतू संविधान चाहिए.... संविधान चाहिए।।

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